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ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर का ‘बिना हस्ताक्षर’ वाला खेल: मरीजों की जान दांव पर, जिम्मेदारी से भाग रहा प्रबंधन!

बस्ती: रद्दी के कागज के बराबर है ओझा डायग्नोस्टिक की रिपोर्ट? बिना मुहर-हस्ताक्षर के थमा रहे हैं 'अनाम' दस्तावेज।

ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर का ‘बिना हस्ताक्षर’ वाला खेल: मरीजों की जान से खिलवाड़ या जिम्मेदारी से बचने की पैंतरेबाज़ी?

बस्ती। जिला अस्पताल के ठीक बगल में स्थित ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर इन दिनों अपनी रिपोर्टों की विश्वसनीयता को लेकर भारी विवादों के घेरे में है। जनहित में की गई मीडिया की सतही पड़ताल में जो सच सामने आया है, वह न केवल चौंकाने वाला है बल्कि जिले के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।IMG 20260311 WA0426 1

💫बिना मुहर-हस्ताक्षर की ‘कच्ची’ रिपोर्ट, आखिर किसका है संरक्षण?

कैली अस्पताल रोड पर स्थित इस सेंटर में अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और पैथोलॉजी जैसी महत्वपूर्ण जांचें होती हैं। दूर-दराज से आए भोले-भाले मरीज जिला अस्पताल के करीब होने के कारण यहाँ अटूट विश्वास के साथ खिंचे चले आते हैं। लेकिन आरोप है कि मरीजों को घंटों इंतजार कराने के बाद जो रिपोर्ट सौंपी जा रही है, उस पर न तो किसी अधिकृत डॉक्टर के हस्ताक्षर हैं और न ही सेंटर की मुहर।FB IMG 1773462201863

💫बड़ा सवाल यह है:

🔥बिना हस्ताक्षर की रिपोर्ट की कानूनी वैधता क्या है?

🔥यदि गलत रिपोर्ट के कारण किसी मरीज की जान पर बन आए, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

🔥क्या भविष्य में किसी भी कानूनी पचड़े से बचने के लिए सेंटर जानबूझकर ‘अनाम’ रिपोर्ट बांट रहा है?

💫मीडिया को गुमराह करने और लीपापोती की कोशिश

जब मीडिया टीम ने इन गंभीर शिकायतों की जमीनी हकीकत जानी, तो दावों में सच्चाई पाई गई। अपनी कमियों को सुधारने के बजाय, सेंटर प्रबंधन अब मामले को दबाने और साक्ष्यों के साथ लीपापोती करने में जुट गया है। चर्चा है कि रसूख के दम पर मीडिया और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।FB IMG 1773488836390

💫स्वास्थ्य विभाग मौन क्यों?

इस पूरे प्रकरण ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। विभाग के जिम्मेदारों से जब इस ‘अवैध’ प्रक्रिया पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे ‘दोषपूर्ण’ मानते हुए रटा-रटाया कार्रवाई का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं?

अब पूरे जनपद की नजरें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव निगम पर टिकी हैं। क्या वे इस ‘रिपोर्ट घोटाले’ की निष्पक्ष जांच कराकर ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर पर कठोर कार्रवाई करेंगे, या भ्रष्टाचार और लापरवाही का यह खेल ऐसे ही बदस्तूर जारी रहेगा?

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